संविधान दिवस समारोह में संविधान के सांस्कृतिक आधार और मूल्यों पर विचार
अजमेर, 26 नवम्बर। संविधान दिवस समारोह के कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि सनातन संस्कृति के नायकों को सम्मान देने के लिए संविधान में उन्हें चित्र रूप में सम्मिलित किया गया है और संविधान भारत के जन के मन की भाषा है। उन्होंने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में भाग लिया तथा इससे पूर्व संविधान उद्यान का अवलोकन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की गतिविधियों से सम्बन्धित न्यूज लेटर त्रिवेणी का विमोचन भी किया गया। अपने सम्बोधन में उन्होंने संविधान निर्माण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर का संविधान समिति में चयन विशेष परिस्थितियों में हुआ और सरदार पटेल के हस्तक्षेप से उन्हें पुनः समिति में भेजा गया। उन्होंने कहा कि संविधान सनातन संस्कृति के मूल्यों पर आधारित है और इसमें संस्कृति की रक्षा करने वाले महापुरुषों को स्थान दिया गया है, जिनके चित्र संविधान की मूल प्रति में उकेरे गए हैं।
उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सही अर्थ, राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की भूमिका, शिक्षा और संस्कार के संतुलन तथा शोध की उपयोगिता पर भी विचार व्यक्त किए। समारोह के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि संविधान सभा के सदस्य आदर्शवादिता, समर्पण और समावेशिता के जीवन मूल्यों के साथ कार्य करते थे और संविधान आज भी सामाजिक व आर्थिक परिवर्तनों के बीच स्थिर शासन देने में सक्षम है। उन्होंने संविधान के मूल स्वरूप, उसमें अंकित सांस्कृतिक प्रतीकों, नीति निर्देशक तत्वों, बन्धुता की भावना और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह में कुलगुरू सुरेश कुमार अग्रवाल ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी, कुलसचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा नगर निगम के उपमहापौर नीरज जैन ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का अभिनन्दन किया।
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