एनडीए की ‘कंजूसी’ पर मांझी बोले—मान्यता पाने के लिए चाहिए थीं ज्यादा सीटें, अपमान से बचना चाहता हूँ
केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए द्वारा उनकी पार्टी को कम सीटें देने में ‘कंजूसी’ की गई, लेकिन उन्होंने इसका विरोध इसलिए नहीं किया क्योंकि वह गठबंधन के भीतर अनुशासित हैं। मांझी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल का दर्जा हासिल करने से जुड़ी थी, क्योंकि बिना मान्यता के उन्हें कई जगहों पर अपमान का सामना करना पड़ता है।
मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी HAMS पिछले 10 साल से अस्तित्व में है, लेकिन अभी तक गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की बैठकों में केवल मान्यता प्राप्त दलों को बुलाया जाता है, इसलिए उन्हें नहीं बुलाया जाता। मतदाता सूचियाँ अन्य दलों को मुफ्त मिलती हैं, लेकिन उनकी पार्टी को उपलब्ध नहीं कराई गईं।
उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से उन्होंने तय छह सीटों से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की थी, ताकि आवश्यक न्यूनतम वोट प्रतिशत हासिल कर पार्टी को मान्यता मिल सके। मांझी ने कहा कि एनडीए गठबंधन में सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत भाजपा के पास है और उसके बाद उनके पास। जनता उनका समर्थन करना चाहती है, लेकिन सीटें देने में कंजूसी हुई, फिर भी उन्होंने विरोध नहीं किया क्योंकि उनकी पार्टी अनुशासित है।
मांझी ने बताया कि भारत का चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को उनके प्रदर्शन के आधार पर राज्यीय दल, राष्ट्रीय दल और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल के रूप में वर्गीकृत करता है, और उनकी कोशिश मान्यता प्राप्त श्रेणी में आने की है।
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