राहुल गांधी की वायु प्रदूषण पर संसद में तत्काल बहस की मांग, केंद्र पर जवाबदेही से भागने का आरोप
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश के कई शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल बताते हुए संसद में तत्काल बहस की मांग की है। शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वायु प्रदूषण जैसी खतरनाक समस्या से निपटने के लिए सरकार के पास “न कोई तत्परता, न योजना और न जवाबदेही” है।
राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा कि हर माँ अपने बच्चे के ज़हरीली हवा में साँस लेने की पीड़ा साझा करती है। उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार इस संकट पर चुप क्यों है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत को वायु प्रदूषण पर संसद में विस्तृत बहस और इस स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए एक सख्त, लागू करने योग्य कार्य योजना की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बच्चे स्वच्छ हवा के हकदार हैं—बहानों और ध्यान भटकाने वाले कदमों के नहीं।
इस बीच, पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस 30 नवंबर को शाम 5 बजे सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर संसदीय रणनीति समूह की बैठक करेगी, जिसमें 1 दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र की रणनीति तैयार की जाएगी।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी वायु प्रदूषण से निपटने में केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन दिल्ली सहित उत्तर भारत में हवा जानलेवा हो चुकी है। केजरीवाल ने एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने को अन्याय बताया और इसे तुरंत हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार समाधान देने में विफल रही है और जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार आज सुबह 8 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 384 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है। 27 नवंबर को शाम 4 बजे एक्यूआई 377 दर्ज किया गया था। मामूली गिरावट के बावजूद शहर की वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर बनी हुई है।
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