इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी से निकला राख का विशाल गुबार सोमवार रात करीब 11 बजे दिल्ली पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञ पिछले एक दिन से इस बादल की दिशा पर नज़र रखे हुए थे, जो लाल सागर के पार लगभग 130 kmph की रफ़्तार से उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा था। लगभग 10,000 साल बाद पहली बार फटे इस ज्वालामुखी से राख और सल्फर डाइऑक्साइड का मोटा गुबार आसमान में 45,000 फीट तक उठ गया।
मौसम ट्रैक करने वालों के अनुसार यह गुबार सबसे पहले पश्चिमी राजस्थान के ऊपर आया। IndiaMetSky Weather Alert ने बताया कि राख का बादल जोधपुर–जैसलमेर क्षेत्र से भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश कर 120–130 kmph की रफ़्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है। राख 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर होने के कारण ज़मीन पर किसी तात्कालिक खतरे की संभावना नहीं है, लेकिन आसमान कुछ समय के लिए अंधकारमय और धुंधला दिखाई दिया।
राख के असर से आसमान में अंधेरा छा गया और कई एयरलाइंस को फ़्लाइट्स को डायवर्ट या रद्द करना पड़ा। दिल्ली के कई हिस्सों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया, जिससे शहर पर ज़हरीले स्मॉग की परत जम गई। आनंद विहार, AIIMS और सफदरजंग क्षेत्र में विज़िबिलिटी काफी कम हो गई।
ज्वालामुखी राख चेतावनी के चलते अकासा एयर, इंडिगो, एयर इंडिया और कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने फ़्लाइट संचालन में बदलाव किए। अकासा एयर ने बताया कि राख के कारण 24 और 25 नवंबर को जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी रूट की फ़्लाइट्स रद्द की गई हैं। इंडिगो ने कहा कि टीमें इंटरनेशनल एविएशन संस्थाओं के साथ मिलकर हालात की निगरानी कर रही हैं और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
एयर इंडिया ने कहा कि फिलहाल उसकी फ़्लाइट्स पर बड़ा असर नहीं पड़ा है, लेकिन सावधानी के तौर पर कुछ विमानों की जांच की जा रही है। एयर इंडिया ने जिन फ़्लाइट्स को रद्द किया है उनमें AI 2822 (चेन्नई–मुंबई), AI 2466 (हैदराबाद–दिल्ली), AI 2444/2445 (मुंबई–हैदराबाद–मुंबई), और AI 2471/2472 (मुंबई–कोलकाता–मुंबई) शामिल हैं।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने एडवाइज़री जारी कर एयरलाइंस को राख वाले क्षेत्रों से बचने, रूट बदलने और इंजनों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। ज्वालामुखी राख विमान संचालन के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है, जिसमें इंजन फेलियर, कॉकपिट विंडो डैमेज और नेविगेशन सिस्टम में रुकावट का जोखिम बढ़ जाता है।
इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार राख का गुबार पूर्व की ओर चीन की तरफ बढ़ रहा है और मंगलवार शाम 7:30 बजे तक भारत से पूरी तरह हट जाएगा। IMD ने गुजरात, दिल्ली-NCR, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में राख के संभावित प्रभाव का संकेत दिया था और सैटेलाइट इमेजरी व VAAC की रिपोर्ट पर लगातार निगरानी रखी।
मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता के मेट वॉच ऑफिस ने ICAO मानक के तहत SIGMET चेतावनियां जारी कर एयरपोर्ट्स को प्रभावित एयरस्पेस से बचने के निर्देश दिए।