केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची, स्थानीय निकाय चुनावों के बीच विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण रोकने की मांग
केरल सरकार ने भारतीय चुनाव आयोग द्वारा राज्य में जारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को स्थगित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में राज्य ने तर्क दिया है कि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (एलएसजीआई) के चुनावों के साथ-साथ एसआईआर प्रक्रिया चलाने से गंभीर प्रशासनिक चुनौतियाँ पैदा होंगी और चुनावों के सुचारू संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राज्य ने यह भी स्पष्ट किया कि जबकि वह भविष्य में एसआईआर की वैधता को चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रखता है, फिलहाल याचिका केवल केरल में संशोधन प्रक्रिया को स्थगित करने पर केंद्रित है।
केरल में 1,200 स्थानीय निकाय चुनाव 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में होने हैं, जिनमें 23,612 वार्ड शामिल हैं। एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई और मसौदा मतदाता सूची 4 दिसंबर को प्रकाशित होनी थी, जिससे संशोधन पूरा करने के लिए मात्र एक माह का समय बचता है। राज्य का कहना है कि यह समय-सारणी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों से सीधे टकराती है।
याचिका में बताया गया है कि स्थानीय निकाय चुनावों के संचालन के लिए 1,76,000 कर्मियों और 68,000 सुरक्षा कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। वहीं एसआईआर प्रक्रिया के लिए 25,668 अतिरिक्त कर्मियों की जरूरत है, जिससे प्रशासनिक मशीनरी पर गंभीर दबाव पड़ता है और नियमित शासन-प्रशासन प्रभावित होने का खतरा है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-यू, तथा केरल पंचायत राज अधिनियम की धारा 38 और केरल नगर पालिका अधिनियम की धारा 94 का हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार पिछली परिषदों की पहली बैठक के पाँच वर्षों के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। नए एलएसजीआई सदस्यों को 21 दिसंबर से पहले शपथ लेनी होगी। राज्य का तर्क है कि इस अवधि में विशेष मतदाता सूची संशोधन करने की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है और चुनाव आयोग ने तत्काल एसआईआर की आवश्यकता का कोई विशेष कारण भी नहीं बताया है।
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