शोपियां में जमात-ए-इस्लामी पर बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी; मीडिया संस्थानों पर दबाव से इंकार
जम्मू-कश्मीर के शोपियां ज़िले में शुक्रवार को पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) से जुड़े कई ठिकानों पर समन्वित छापेमारी की। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विभिन्न स्थानों पर सावधानीपूर्वक तलाशी ली गई, जिनका लक्ष्य प्रतिबंधित संगठन से जुड़े व्यक्ति और परिसर थे। जमात-ए-इस्लामी जम्मू और कश्मीर पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत भारत सरकार कई बार प्रतिबंध लगा चुकी है। सबसे हालिया प्रतिबंध 2019 में उसके कथित राष्ट्र-विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों तथा हिज़्बुल मुजाहिदीन से संबंधों के आरोपों पर लगाया गया था, जिसे फरवरी 2024 में पाँच वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया।
जमात-ए-इस्लामी एक इस्लामी आंदोलन है जिसकी स्थापना 1941 में ब्रिटिश भारत में सैयद अबुल आला मौदूदी ने की थी। 1947 में विभाजन के बाद यह दो संगठनों में विभाजित हुआ—पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी और भारत में जमात-ए-इस्लामी हिंद। छापेमारी के विस्तृत परिणामों की जानकारी की प्रतीक्षा है। इससे पहले अनंतनाग पुलिस ने भी 12 नवंबर को प्रतिबंधित संगठन के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था।
राज्य जाँच एजेंसी (SIA) की एक टीम ने 20 नवंबर को जम्मू स्थित कश्मीर टाइम्स के कार्यालय पर भी छापा मारा। इस कार्रवाई को लेकर उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि जाँच एजेंसियों को छापेमारी के दौरान मीडिया संस्थानों को “चुन-चुनकर” निशाना नहीं बनाना चाहिए और प्रेस पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई गलत काम हुआ है तो कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन दबाव बनाने के लिए नहीं। उन्होंने प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए पत्रकारिता की स्वतंत्रता की आवश्यकता पर जोर दिया।
कश्मीर टाइम्स की स्थापना 1954 में वेद भसीन ने की थी और यह जम्मू-कश्मीर के सबसे पुराने अंग्रेज़ी दैनिकों में से एक है।
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