Trending News

संघ कार्यक्रम में धनखड़ की दमदार वापसी, सांस्कृतिक नेतृत्व पर जोर

:: Editor - Omprakash Najwani :: 22-Nov-2025
:

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद से चार महीने पहले स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और मंच पर लौटते ही अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट कर दिया। आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक हम और यह विश्व के विमोचन समारोह में धनखड़ ने संघ की विचारधारा की खुलकर सराहना की और भारत की सांस्कृतिक शक्ति तथा सभ्यतागत आत्मविश्वास को वैश्विक नेतृत्व का आधार बताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धनखड़ ने कहा कि भारत को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर दुनिया से संवाद करना चाहिए। उन्होंने पुस्तक को “दिमाग का टॉनिक” बताया और कहा कि यह भारतीय सभ्यताओं की निरंतरता और शक्ति को समझने का अवसर देती है। संबोधन हिंदी में शुरू करने के बाद उन्होंने अंग्रेज़ी में बोलते हुए कहा, “जो लोग समझना ही नहीं चाहते, उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब देना पड़ेगा।”

धनखड़ ने कहा कि भारत के पास छह हजार वर्षों के सांस्कृतिक अनुभव के आधार पर अशांत दुनिया का मार्गदर्शन करने की अनूठी क्षमता है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय दौरे पर हुए विवाद को “सुनियोजित नैरेटिव” बताया। मंच पर उन्हें 7:30 बजे की फ्लाइट की याद दिलाई गई तो उन्होंने कहा, “मैं फ्लाइट पकड़ने के लिए अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ सकता और मेरा हाल का अतीत इसका सबूत है।”

धनखड़ के इस कार्यक्रम में शामिल होने से कांग्रेस का वह दावा भी कमजोर हुआ है कि भाजपा ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के लिए मजबूर किया था। यदि ऐसा होता, तो उनका पहला सार्वजनिक मंच संघ का कार्यक्रम नहीं होता और न ही उनका संबोधन इतना विचारात्मक व संघ-समर्थक होता। कांग्रेस उम्मीद कर रही थी कि इस्तीफे के बाद धनखड़ भाजपा और संघ पर तीखे हमले करेंगे, लेकिन इसके उलट उन्होंने संघ की विचारधारा की प्रशंसा की और भाजपा के विमर्श को बल दिया।

कांग्रेस की राजनीतिक उम्मीदों को झटका तब लगा, जब धनखड़ ने संघ के मंच पर अपनी वैचारिक स्पष्टता दिखाते हुए संकेत दिया कि उन्होंने वास्तव में स्वास्थ्य कारणों से ही इस्तीफा दिया था। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने टिप्पणी की कि हवाई अड्डे पर कोई भाजपा नेता धनखड़ को रिसीव करने नहीं आया और इसे “इस्तेमाल करो और फेंको” की नीति बतायाजहां तक संबोधन की बड़ी बातों की बात है, धनखड़ ने कहा कि भारत को सभ्यतागत ताकत और आत्मविश्वास के साथ दुनिया से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुस्तक भारत की सांस्कृतिक नींव पर विश्वास को मजबूत करने के लिए “दिमाग के टॉनिक” की तरह काम करती है। यह पुस्तक आठ वर्षों में लिखे गए लेखों का संग्रह है जिसमें प्रणब मुखर्जी पर भी दो लेख शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास सदियों के सतत ज्ञान के चलते अशांत दुनिया का मार्गदर्शन करने की क्षमता है।

प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय दौरे का जिक्र करते हुए धनखड़ ने कहा कि उस समय अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया था, जबकि प्रणब मुखर्जी ने इसे भारत माता के एक महान सपूत को श्रद्धांजलि बताकर शांत कर दिया था। धनखड़ ने कहा कि एक खिलते हुए भारत को आकार देने की मुख्य जिम्मेदारी उसके लोगों की है और नागरिकों में आर्थिक राष्ट्रवाद, सुरक्षा के मजबूत इकोसिस्टम और गहरे सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने की असीम क्षमता होती है।


( Connecting with social media platform )
Facebook | Youtube   |
( पर फ़ॉलो भी कर सकते है )

Latest News