रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र भारत को बना रहा वैश्विक स्थिरता की शक्ति
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आत्मनिर्भरता के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और एक ऐसा रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए बाहरी निर्भरता को कम करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में ‘चाणक्य रक्षा संवाद’ को संबोधित करते हुए कहा कि एक स्थिर भारत, एक स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भारत शक्ति, सुरक्षा और विकास के पथ पर आगे बढ़ता है, तो इसका लाभ विश्व समुदाय को मिलता है। भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल अनेक देशों के लिए समावेशी, पारदर्शी और सुरक्षित शासन का आदर्श बन चुका है। उभरती प्रौद्योगिकियों—कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर और अंतरिक्ष—के प्रति भारत का नैतिक दृष्टिकोण वैश्विक मानकों को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि भारत शांति, जलवायु उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि सरकार केंद्रित सुधारों के माध्यम से राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत कर रही है। सीमा और समुद्री बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि सुरक्षा के साथ संपर्क व्यवस्था बेहतर हो सके। नए प्लेटफार्मों, प्रौद्योगिकी और संरचनाओं के माध्यम से सेनाओं का आधुनिकीकरण भी तेजी से जारी है। खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने बताया कि स्टार्टअप्स, गहन तकनीक और अनुसंधान एवं विकास में निवेश भारत को भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए तैयार कर रहा है। साथ ही सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के हितों को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा कि ये सभी प्रयास मिलकर भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा और विकास की मजबूत नींव रखते हैं और ऐसे मंच चिंतन तथा सुधार के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
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